झारखंड हाईकोर्ट ने हजारीबाग जिले की गंभीर घटना पर स्वतः संज्ञान लिया है। विष्णुगढ़ प्रखंड के कोसुंभा गांव में नाबालिग की हत्या का मामला सामने आया था। अदालत ने इसे समाज के लिए चिंताजनक बताया। न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने डीजीपी, गृह सचिव और एसपी को नोटिस जारी किया। सभी अधिकारियों से जवाब दाखिल करने को कहा गया। अदालत ने मामले को चीफ जस्टिस के समक्ष भेज दिया। न्यायालय ने त्वरित और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता बताई। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में देरी अस्वीकार्य है। घटना ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट को घटना की पूरी जानकारी दी गई। दस्तावेजों के आधार पर अदालत ने मामले को गंभीर माना। प्राथमिकी दर्ज करने में हुई देरी पर सवाल उठाए गए। अदालत ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति बताया। पुलिस अधिकारी वर्चुअल रूप से उपस्थित हुए। कोर्ट ने जांच की प्रगति पर विस्तार से पूछताछ की। वैज्ञानिक साक्ष्यों के संकलन पर विशेष ध्यान दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि तकनीकी जांच जारी है। टीम लगातार साक्ष्य एकत्र कर रही है। जल्द निष्कर्ष आने की बात कही गई।
कोर्ट ने जांच में धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त की। कहा कि अब तक ठोस परिणाम सामने आने चाहिए थे। फॉरेंसिक प्रक्रिया को मजबूत करने की बात कही गई। साक्ष्य संरक्षण पर विशेष निर्देश दिए गए। अदालत ने जिम्मेदारी तय करने के संकेत दिए। न्यायालय ने मीडिया की भूमिका की सराहना की। कहा कि समाचारों ने मामले को सामने लाया। कोर्ट ने पारदर्शिता बनाए रखने पर जोर दिया। अगली सुनवाई में विस्तृत स्थिति रिपोर्ट मांगी गई है। इस आदेश से जांच एजेंसियों पर दबाव बढ़ गया है।



