
जहां कई लोग इसे खुशी के साथ देख रहे हैं, वहीं भविष्य को लेकर चिंताएं भी बनी हुई हैं।
मुख्य बिंदु:
- सीरिया लौटने का सिलसिला शुरू:
लेबनान के मसना बॉर्डर क्रॉसिंग पर हजारों सीरियाई नागरिक अपने देश लौटने के लिए उमड़े। - 14 साल के इंतजार का अंत:
हम्मा के शरणार्थी सामी अब्देल-लतीफ ने कहा, “कुछ भी असद से बेहतर है,” वह अपनी पत्नी और चार बच्चों के साथ सीरिया लौट रहे हैं। - दमिश्क वापसी की तैयारी:
मलाक मातर ने कहा, “अब सीरियाई नागरिकों को एक संगठित राज्य बनाना होगा और अपने देश की देखभाल करनी होगी।” - जॉर्डन में जश्न:
अम्मान निवासी मुहाब अल-मजाली ने कहा, “असद के पतन से अन्याय और तानाशाही शासन का अंत हो गया।” - मिश्रित प्रतिक्रियाएं:
कुछ विशेषज्ञों और आम नागरिकों ने नए शासन में अस्थिरता और कट्टरपंथ के खतरे को लेकर चिंता जताई है। - पड़ोसी देशों में उम्मीद:
लेबनान और तुर्की जैसे देशों में रहने वाले शरणार्थियों को उम्मीद है कि यह बदलाव सीरिया में स्थिरता और पुनर्निर्माण का मार्ग प्रशस्त करेगा। - युद्ध के बाद पुनर्निर्माण की चुनौती:
विशेषज्ञों का मानना है कि सीरिया को फिर से खड़ा करने और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने में सालों लग सकते हैं। - अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं:
पश्चिमी देशों ने तानाशाही शासन के पतन का स्वागत किया, लेकिन आतंकवादी संगठनों के नियंत्रण पर चिंता व्यक्त की। - सीरियाई जनता का आत्मनिर्भर बनने का आह्वान:
लौट रहे नागरिकों का मानना है कि अब उनकी जिम्मेदारी है कि वे अपने देश को बेहतर बनाएं। - आशा और अनिश्चितता का मिश्रण:
अधिकांश सीरियाई नागरिकों में असद के पतन के बाद खुशी तो है, लेकिन नए शासन के स्वरूप को लेकर संदेह भी है।