
क्या है सीवीड खेती?
- समुद्री शैवाल की खेती को ग्रीन टेक्नोलॉजी माना जाता है।
- यह कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करने में मदद करती है।
- समुद्री जैव विविधता को संरक्षित रखने में योगदान देती है।
सीवीड खेती के जलवायु लाभ
- ग्लोबल वार्मिंग कम करने में सहायक।
- मरीन इकोसिस्टम को संतुलित बनाए रखती है।
- समुद्री प्रदूषण को कम करने में मदद करती है।
- समुद्र में अम्लता (एसिडिटी) घटाने में सहायक।
आर्थिक और सामाजिक लाभ
- मत्स्यपालकों और तटीय समुदायों के लिए रोजगार के अवसर।
- खाद्य, औषधि और जैव ईंधन उद्योग के लिए उपयोगी।
- कृषि और उद्योगों के लिए कच्चा माल उपलब्ध कराती है।
भारत में सीवीड खेती की संभावनाएं
- भारत के तमिलनाडु, गुजरात, महाराष्ट्र और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में उपयुक्त परिस्थितियां हैं।
- सरकार द्वारा सीवीड उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं बनाई जा रही हैं।
- तटीय क्षेत्रों में महिलाओं के लिए आजीविका का नया साधन बन सकता है।
निष्कर्ष
- जलवायु परिवर्तन से निपटने और सतत विकास के लिए सीवीड खेती एक कारगर उपाय है।
- इसके अधिकतम उपयोग के लिए सरकार, वैज्ञानिकों और किसानों को मिलकर काम करने की जरूरत है।