
ट्रम्प ने इस कदम को ‘लिबरेशन डे’ (मुक्ति दिवस) कहा है। इस विषय पर प्रसिद्ध अर्थशास्त्री कौशिक बसु ने ‘ईनाडु’ को दिए इंटरव्यू में अपने विचार साझा किए।
मुख्य बिंदु
ट्रम्प की आर्थिक नीतियों की व्याख्या कठिन है, क्योंकि ‘रिसीप्रोकल टैरिफ़’ का स्पष्ट अर्थ नहीं है।
अमेरिका उन देशों पर शुल्क बढ़ाएगा, जो अमेरिका के साथ व्यापार अधिशेष (ट्रेड सरप्लस) रखते हैं।
ट्रम्प ने ऑटोमोबाइल और ऑटो पार्ट्स पर 25% टैरिफ लगाने का आदेश दिया।
इस तरह के अतिरिक्त शुल्क वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाएंगे।
लंबे समय में अमेरिका की खुद की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित होगी, क्योंकि यह व्यापार प्रतिस्पर्धा को कमजोर करेगा।
भारत को क्या कदम उठाने चाहिए?
कौशिक बसु के अनुसार, भारत को अपने शुल्क कम करने चाहिए।
1990 के आर्थिक सुधारों के दौरान शुल्क कम करने से भारत को जबरदस्त आर्थिक फायदा हुआ था।
2014 के बाद से भारत में 3,200 से अधिक टैरिफ़ बढ़ाए गए।
2014 में औसत टैरिफ़ 13% था, जो अब बढ़कर 18% हो गया है।
भारत को कनाडा, मैक्सिको और चीन जैसे देशों के साथ व्यापार बढ़ाना चाहिए।
फार्मा उत्पादों पर टैरिफ का असर
ट्रम्प ने फार्मा उत्पादों पर भी टैरिफ़ बढ़ाने का निर्णय लिया है।
भारत दुनिया के सबसे बड़े फार्मा उत्पादक देशों में से एक है, जिससे इसका सीधा असर पड़ेगा।
अमेरिका में बिना स्वास्थ्य बीमा वाले लोगों पर इसका बुरा असर होगा।
महंगी दवाओं से गरीब और मध्यम वर्ग के अमेरिकी नागरिकों की मुश्किलें बढ़ेंगी।
भारत के लिए यह चिंता का विषय है, क्योंकि फार्मा निर्यात बड़ा व्यापारिक क्षेत्र है।
अंतर्राष्ट्रीय बाजार पर असर
वैश्विक व्यापार को ट्रम्प की इस नीति से झटका लग सकता है।
अमेरिका के व्यापारिक साझेदारों को जवाबी कार्रवाई करनी पड़ सकती है।
चीन, यूरोपीय संघ और अन्य देश भी इस कदम के खिलाफ व्यापारिक फैसले ले सकते हैं।
अमेरिकी कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ सकती है।
भारत को इस अवसर का उपयोग वैश्विक व्यापार संबंधों को मजबूत करने के लिए करना चाहिए।