झारखंड में नवंबर के दौरान माओवादी संगठन के कार्यक्रमों को लेकर पुलिस प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। पुलिस मुख्यालय की ओर से सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों को सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखने का निर्देश मिला है। डीजीपी कार्यालय ने एसएसपी और एसपी को विशेष निगरानी सुनिश्चित करने को कहा है। भाकपा (माओवादी) संगठन 8 नवंबर से 15 नवंबर तक खूनी क्रांति सप्ताह मनाता है। 16 से 22 नवंबर के बीच दमन विरोधी सप्ताह आयोजित किया जाता है। इसके बाद 24 से 30 नवंबर तक शहीद सप्ताह मनाया जाता है। इन कार्यक्रमों के दौरान नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा को लेकर विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है। पुलिस का उद्देश्य किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पहले से आवश्यक इंतजाम करना है।
रेलवे से जुड़े प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को लेकर विशेष निर्देश दिए गए हैं। रेलवे स्टेशनों और रेलखंडों पर निगरानी बढ़ाई जाएगी। रेल पटरियों और ट्रेनों की सुरक्षा पर भी ध्यान दिया जाएगा। रेलवे पुल-पुलियों और संस्थानों को भी संवेदनशील माना गया है। मार्ग रक्षण दल तथा रेलवे के शस्त्रागार की सुरक्षा मजबूत रखने को कहा गया है। इसके अलावा स्थानीय थानों और पुलिस पिकेटों को सतर्क रहने का निर्देश दिया गया है। सीआरपीएफ कैंपों की निगरानी भी बढ़ाई जाएगी।
सरकारी और वित्तीय संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी पुलिस मुख्यालय का ध्यान है। प्रखंड, अंचल, अनुमंडल और जिला कार्यालयों को विशेष निगरानी में रखने को कहा गया है। बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों की सुरक्षा की समीक्षा की जाएगी। वन विभाग के कार्यालयों और गोदामों पर भी नजर रखी जाएगी। दूरदराज के मोबाइल बीटीएस टावरों की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने का निर्देश है। कोल साइडिंग और कोल डंप में भी निगरानी बढ़ाई जाएगी। खनन क्षेत्रों को भी सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील माना गया है। पुलिस को राष्ट्रीय राजमार्गों और राज्य मार्गों पर चौकसी रखने को कहा गया है। अन्य महत्वपूर्ण सड़कों, पुल-पुलियों और हाट-बाजारों की निगरानी भी की जाएगी। इन रास्तों पर चलने वाले वाहनों की गतिविधियों पर नजर रखने का निर्देश है।
सुरक्षा बलों, एसपीओ और पुलिस समर्थकों की सुरक्षा को भी अहम माना गया है। संबंधित अधिकारियों को उनकी सुरक्षा के लिए जरूरी सतर्कता बरतने को कहा गया है। पुलिस मुख्यालय के अनुसार, माओवादी संगठन की ताकत में लगातार कमी आई है। संगठन के सदस्यों के आत्मसमर्पण और पुनर्वास से उसकी स्थिति प्रभावित हुई है। इसके अलावा गिरफ्तारियों के कारण भी संगठन कमजोर हुआ है। हालांकि, पुलिस किसी भी संभावित घटना को लेकर जोखिम नहीं लेना चाहती। इसी वजह से नवंबर के सभी कार्यक्रमों के दौरान जिलों को अलर्ट रहने का निर्देश दिया गया है।



