इस पहल का उद्देश्य बीएलओ और नागरिकों के बीच बातचीत को और अधिक सुगम और विश्वसनीय बनाना है। अभी तक, विभिन्न राज्यों में बीएलओ के लिए अलग-अलग प्रकार के पहचान पत्र उपयोग किए जाते थे, जिससे कई बार नागरिकों को उनकी पहचान को लेकर संदेह होता था।
नए मानक पहचान पत्र में बीएलओ का नाम, पदनाम और निर्वाचन आयोग का आधिकारिक लोगो होगा। इसके अतिरिक्त, इसमें एक विशिष्ट पहचान संख्या भी होगी, जिसे ऑनलाइन सत्यापित किया जा सकेगा। निर्वाचन आयोग का मानना है कि इस कदम से बीएलओ की विश्वसनीयता बढ़ेगी और नागरिक बिना किसी झिझक के उनसे चुनावी प्रक्रिया से संबंधित जानकारी और सहायता प्राप्त कर सकेंगे। यह कदम चुनावी प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और नागरिक-अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
यह नई व्यवस्था जल्द ही पूरे देश में लागू की जाएगी और सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। निर्वाचन आयोग का मानना है कि बीएलओ चुनावी प्रक्रिया की नींव होते हैं और उन्हें एक आधिकारिक पहचान प्रदान करना उनके कार्य को और अधिक प्रभावी बनाएगा।


