झारखंड हाईकोर्ट ने गुमला की लापता बच्ची के मामले में सुनवाई की। अदालत ने इसे मानवीय दृष्टि से देखने की जरूरत बताई। कोर्ट ने कहा कि आधार ट्रेस प्रक्रिया जटिल है। पुलिस को बार-बार कोर्ट का सहारा लेना पड़ता है। इससे जांच धीमी होती है। बच्चों के मामलों में देरी गंभीर है।
कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से एसओपी बनाने पर विचार करने को कहा। अदालत ने कहा कि हर पीड़ित परिवार कोर्ट नहीं पहुंच सकता। सरकार को व्यावहारिक समाधान निकालना होगा। यूआईडीएआई से जानकारी मिलने में देरी चिंता का विषय है। अगली सुनवाई में सुझाव पेश करने होंगे।
कोर्ट को बताया गया कि बच्ची की तलाश में एसआईटी लगी है। वर्ष 2023 में नौ बच्चे बरामद किए गए थे। दिल्ली तक जांच की गई थी। बच्ची की मां के साथ मारपीट मामले में एफआईआर दर्ज है। कोर्ट ने अगली सुनवाई 25 फरवरी तय की है। मामला निगरानी में रहेगा।


