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अवैध हिरासत प्रकरण में हाईकोर्ट ने पुलिस कार्यशैली परखीं.

मैट्रिक छात्र मामले में न्यायिक निगरानी और जवाबदेही सख्त.

झारखंड हाईकोर्ट ने मैट्रिक छात्र की अवैध हिरासत से जुड़े मामले की फिर सुनवाई की।
यह सुनवाई दोपहर एक बजे शुरू हुई।
कोर्ट के निर्देश पर चतरा के पुलिस अधीक्षक ऑनलाइन उपस्थित हुए।
एसपी ने अदालत के समक्ष केस डायरी का अवलोकन कराया।
डायरी में 27 और 30 जनवरी की पूछताछ का उल्लेख सामने आया।
कोर्ट ने पूछताछ की परिस्थितियों पर ध्यान केंद्रित किया।
रात के समय छात्र को घर से उठाने पर सवाल उठाए गए।
न्यायालय ने पुलिस प्रक्रिया की वैधता पर टिप्पणी की।
मामले को गंभीर प्रशासनिक चूक से जोड़ा गया।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून सभी पर समान रूप से लागू होता है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अगली तारीख 13 फरवरी तय की।
अदालत ने अनुसंधानकर्ता को केस डायरी पेश करने का आदेश दिया।
खंडपीठ ने जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने की बात कही।
न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और एके राय ने आदेश पारित किया।
इसके बाद चतरा डीएसपी और थाना प्रभारियों को आंशिक राहत दी गई।
जब्त मोबाइल उन्हें वापस सौंप दिए गए।
हालांकि अगली सुनवाई में सशरीर उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया।
कोर्ट ने भविष्य में लापरवाही न बरतने की चेतावनी दी।
न्यायिक अनुशासन बनाए रखने पर जोर दिया गया।
मामले की निरंतर निगरानी की बात कही गई।

यह मामला छात्र की मां द्वारा दायर हेबियस कॉर्पस से सामने आया।
आरोप है कि छात्र को नियमों के विरुद्ध हिरासत में रखा गया।
पूछताछ के बाद भी छात्र को तुरंत रिहा नहीं किया गया।
करीब दस दिनों तक हिरासत में रखने का दावा किया गया।
पहली सुनवाई में भी कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया था।
तब पुलिस अधिकारियों को कोर्ट में बैठाया गया था।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ताओं ने तथ्य रखे।
सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता ने पक्ष प्रस्तुत किया।
मामला प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा बताया जा रहा है।
अगली सुनवाई पर पूरे राज्य की नजर बनी हुई है।

 

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