हाईकोर्ट का यह फैसला केवल एक आरोपी तक सीमित नहीं है।
यह पूरे शराब घोटाले की जांच को प्रभावित करता है।
नवीन केडिया को जमानत नहीं मिलने से जांच मजबूत हुई है।
एसीबी को आगे बढ़ने का रास्ता मिला है।
सरेंडर को आधार बनाकर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया।
इससे कानूनी प्रक्रिया की अहमियत सामने आई।
भविष्य में ऐसे मामलों में आरोपी सतर्क रहेंगे।
कानून से बचने की कोशिशें कठिन होंगी।
अब सबकी नजर अगली कानूनी कार्रवाई पर है।
जांच एजेंसी सबूतों को मजबूत कर रही है।
मामले का असर राज्य की राजनीति पर भी पड़ सकता है।
यह फैसला आने वाले समय में चर्चा का विषय रहेगा।


