
- केंद्र से अपील:
उमर ने कहा कि केंद्र सरकार को रोहिंग्या शरणार्थियों के भविष्य पर फैसला लेना चाहिए। - वापसी या मदद:
उन्होंने कहा कि यदि उन्हें वापस भेजा जा सकता है, तो भेजा जाए। लेकिन अगर ऐसा संभव नहीं है, तो उन्हें भूख और सर्दी में मरने नहीं दिया जा सकता। - इंसानियत की दुहाई:
उमर ने रोहिंग्याओं के साथ गरिमा के साथ पेश आने की बात कही। - जानवरों जैसा व्यवहार नहीं:
मुख्यमंत्री ने कहा कि रोहिंग्या भी इंसान हैं और उनके साथ जानवरों जैसा व्यवहार नहीं होना चाहिए। - रोहिंग्या विवाद:
देशभर में रोहिंग्या शरणार्थियों को लेकर बहस तेज है, कई लोग उनकी तत्काल वापसी की मांग कर रहे हैं। - जम्मू में बसे रोहिंग्या:
जम्मू में रोहिंग्या शरणार्थियों की बड़ी संख्या बसी हुई है। - मानवीय दृष्टिकोण:
उमर ने शरणार्थियों के मुद्दे को मानवाधिकारों के नजरिए से देखने की अपील की। - सर्दी में खतरा:
उन्होंने कहा कि सर्दी में रोहिंग्याओं को सुरक्षित और गरिमापूर्ण आश्रय की जरूरत है। - केंद्र का रवैया:
केंद्र सरकार ने अभी तक इस मुद्दे पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया है। - राजनीतिक विवाद:
रोहिंग्या शरणार्थियों को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच मतभेद जारी है। - स्थानीय विरोध:
जम्मू में रोहिंग्याओं की उपस्थिति पर स्थानीय स्तर पर भी विरोध दर्ज हुआ है। - संवेदनशील मुद्दा:
उमर ने इस मुद्दे को अत्यंत संवेदनशील और मानवता से जुड़ा बताया। - विकल्पों की तलाश:
उन्होंने कहा कि सरकार को उनके भविष्य के लिए विकल्प तलाशने चाहिए। - अंतरराष्ट्रीय दबाव:
भारत पर इस मामले में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान देने का दबाव है। - शरणार्थियों की दुर्दशा:
रोहिंग्याओं के पास बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है। - सामाजिक तनाव:
रोहिंग्याओं की उपस्थिति से स्थानीय समुदाय में तनाव बढ़ा है। - शांति बनाए रखने की अपील:
उमर ने स्थानीय निवासियों से भी शांति बनाए रखने की अपील की। - संविधान के तहत अधिकार:
उन्होंने संविधान के तहत रोहिंग्याओं को बुनियादी अधिकार दिए जाने की बात कही। - मानवीयता पर जोर:
उमर ने कहा कि शरणार्थियों की देखभाल करना हर सरकार की जिम्मेदारी है। - नीति बनाने की आवश्यकता:
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर जल्द नीति बनाने की मांग की।