हैदराबाद, तेलंगाना: चक्रवात मोंथा के कारण हुई दो दिनों की मूसलाधार बारिश के बाद तेलंगाना इस समय भीषण बाढ़ की चपेट में है। इस प्राकृतिक आपदा के कारण अब तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है और 4 लोग लापता बताए जा रहे हैं। राज्य के कई हिस्सों में, विशेष रूप से वारंगल और नलगोंडा तथा नागरकरनूल के आदिवासी क्षेत्रों में, चारों ओर पानी ही पानी भर गया है, जिससे जन-जीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है।
नदियों और बाँधों के ओवरफ्लो होने से स्थिति गंभीर बनी हुई है। बाढ़ के पानी ने कृषि क्षेत्र को सबसे अधिक नुकसान पहुँचाया है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, राज्य में लगभग 4.47 लाख एकड़ से अधिक की फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गई हैं। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है, और खाद्य सुरक्षा को लेकर भी चिंताएँ बढ़ गई हैं। प्रशासन राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीमों के साथ मिलकर बचाव और राहत कार्यों में जुटा हुआ है।
मुख्यमंत्री ने स्थिति की उच्च स्तरीय समीक्षा की है और प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल सहायता पहुँचाने के निर्देश दिए हैं। लापता लोगों की तलाश के लिए अभियान तेज कर दिया गया है। सरकार ने पीड़ितों के लिए क्षतिपूर्ति और किसानों के लिए विशेष पैकेज की घोषणा करने का आश्वासन दिया है। इस आपदा ने राज्य के बुनियादी ढाँचे और आपदा प्रबंधन प्रणाली के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।



