रांची : राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रूपेश कुमार पर की गई कार्रवाई सिर्फ एक व्यक्तिगत मामला नहीं, बल्कि प्रशासनिक अनुशासन की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश है। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जाति प्रमाण-पत्र लेकर परीक्षा पास करना शासन व्यवस्था में गंभीर अनैतिकता माना जाता है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद सरकार द्वारा आरोपों को नए सिरे से गठित करना बताता है कि अब मामले में ढील नहीं दी जाएगी। हालांकि, परिवार की व्यक्तिगत परिस्थितियों का भी उल्लेख किया गया, लेकिन प्रशासन ने न्यायिक प्रक्रिया को प्राथमिकता दी।
निलंबन बरकरार रखते हुए उनका मुख्यालय हजारीबाग में तय करना यह दर्शाता है कि सरकार जांच पूरी होने तक किसी भी दबाव में नहीं झुकना चाहती। यह कदम योग्यता आधारित व्यवस्था की मजबूती का संकेत भी माना जा रहा है।



