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झारखंड हाईकोर्ट ने ग्राम विकास समिति गठन को वैध ठहराया.

अदालत बोली पंचायत अधिकार प्रभावित नहीं, जनभागीदारी बढ़ाने का उद्देश्य.

रांची से जुड़ी एक महत्वपूर्ण कानूनी खबर में झारखंड हाईकोर्ट ने ग्राम विकास समिति और आदिवासी विकास समिति के गठन को लेकर दायर जनहित याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि इन समितियों का गठन कानून के दायरे में किया गया है। यह फैसला राज्य सरकार के पक्ष में माना जा रहा है। जनहित याचिका सुनील उरांव द्वारा दायर की गई थी। याचिका में समिति गठन को पंचायत व्यवस्था के खिलाफ बताया गया था। अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद निर्णय सुनाया। कोर्ट ने कहा कि ग्राम विकास समिति पंचायत के अधिकारों में हस्तक्षेप नहीं करती। इसका मुख्य उद्देश्य गांवों के विकास में आम लोगों की भागीदारी बढ़ाना है। फैसले के बाद राज्य सरकार को बड़ी राहत मिली है। ग्रामीण विकास योजनाओं के संचालन को लेकर अब स्थिति स्पष्ट हो गई है।

हाईकोर्ट की खंडपीठ में न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय और न्यायमूर्ति दीपक रोशन ने मामले की सुनवाई की। अदालत ने कहा कि ग्राम सभा की शक्तियां इस समिति से कम नहीं होती हैं। समिति केवल विकास कार्यों में सहयोग की भूमिका निभाती है। याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर सके कि 13 मार्च 2018 का सरकारी प्रस्ताव कानून के खिलाफ है। अदालत ने कहा कि पंचायत व्यवस्था और समिति की भूमिका अलग-अलग है। समिति का उद्देश्य प्रशासन और जनता के बीच समन्वय बढ़ाना है। न्यायालय ने यह भी माना कि ग्रामीण स्तर पर सहभागिता लोकतंत्र को मजबूत करती है। इसलिए समिति गठन को असंवैधानिक नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए याचिका खारिज कर दी। इस फैसले को ग्रामीण प्रशासन के लिए अहम माना जा रहा है।

मामले में राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि समिति छोटे विकास कार्यों को तेजी से पूरा करने के लिए बनाई गई है। समिति पांच लाख रुपये तक के विकास कार्य करा सकती है। यह कार्य ब्लॉक विकास पदाधिकारी के प्रशासनिक और वित्तीय नियंत्रण में होता है। सरकार ने कहा कि पंचायत के अधिकार पूरी तरह सुरक्षित हैं। समिति केवल सहयोगी संस्था के रूप में काम करती है। इससे गांवों में स्थानीय लोगों की जिम्मेदारी बढ़ेगी। विकास योजनाओं में पारदर्शिता और भागीदारी भी बढ़ेगी। अदालत ने सरकार की दलीलों को उचित माना। फैसले के बाद गांवों में विकास योजनाओं को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इस निर्णय को ग्रामीण विकास व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 

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