सुबह की हल्की धूप में कोकर स्थित समाधि स्थल का दृश्य बेहद भावुक था। लोग टोलियों में अपने महानायक को सम्मान देने पहुंचे थे। भगवा और सफेद फूलों से स्थल को सजाया गया था। राज्यपाल और मुख्यमंत्री की मौजूदगी ने वातावरण को गंभीर बना दिया। श्रद्धा के स्वर हवा में तैर रहे थे। मुख्यमंत्री ने हाथ जोड़कर लंबे समय तक मौन साधा। विधायक कल्पना सोरेन भी साधारण अंदाज में खड़ी थीं। उनका सम्मान जनसमूह को प्रभावित कर रहा था। लोग शांत भाव से मंच के सामने खड़े थे। पारंपरिक ढोल की थाप वातावरण में गूंज रही थी।
कार्यक्रम में आदिवासी समाज की मूल पहचान दिखाई दी। बच्चों के चेहरे पर उत्साह था। महिलाएं अपनी पारंपरिक साड़ी में आई थीं। पुरुषों ने पगड़ी पहनी थी। हर कोई इस दिन को खास मान रहा था। मुख्यमंत्री की सोशल मीडिया पोस्ट लोगों में तेजी से फैल रही थी। हजारों लोगों ने उसे साझा किया। जयंती की भावना पूरे शहर में दिखाई दे रही थी। पोस्टर, ध्वज और बैनर शहर के हर चौक पर लगे थे। प्रमुख स्थानों पर फूलों की सजावट की गई थी। श्रद्धा और उत्साह का मिश्रित माहौल बना रहा।
कार्यक्रम समाप्त होने के बाद भी लोग स्थल से हट नहीं रहे थे। कई लोग चुपचाप बैठकर धरती आबा को निहारते रहे। युवाओं ने कसम खाई कि वे उनके आदर्शों पर चलेंगे। बुजुर्गों ने कहा कि यह जयंती नई चेतना लाती है। बच्चे भी प्रेरित दिखे। प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था का अच्छा प्रबंधन किया। कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित रहा। लोगों ने सरकार की योजनाओं को भी सराहा। इस जयंती ने इतिहास के प्रति सम्मान को और गहरा किया। पूरा राज्य इस आयोजन को लंबे समय तक याद रखेगा।



