भारत में खुदरा महंगाई जुलाई तक 2% से नीचे संभव।
मुंबई: भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की अनुसंधान शाखा एसबीआई रिसर्च ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक अनुमान जारी किया है।
एसबीआई रिसर्च के मुताबिक, देश की खुदरा महंगाई दर, जिसे उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) द्वारा मापा जाता है, जुलाई 2025 तक 2% या उससे भी नीचे गिर सकती है। यह भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 4% के मध्यम अवधि के लक्ष्य के काफी करीब होगा, जो आर्थिक स्थिरता के लिए एक अच्छा संकेत है।
यह अनुमानित गिरावट मुख्य रूप से विभिन्न कारकों पर आधारित है, जिनमें संभावित रूप से अनुकूल मानसून, वैश्विक कमोडिटी कीमतों में स्थिरता और सरकार द्वारा आपूर्ति-पक्ष के उपायों को मजबूत करना शामिल है। मुद्रास्फीति में निरंतर गिरावट से आम उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलने और उनकी क्रय शक्ति बढ़ने की उम्मीद है, जिससे समग्र आर्थिक वृद्धि को भी बढ़ावा मिल सकता है।
महंगाई में यह संभावित कमी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को अपनी मौद्रिक नीति पर पुनर्विचार करने का अवसर दे सकती है। कम मुद्रास्फीति दर ब्याज दरों को कम करने के लिए एक अनुकूल माहौल बना सकती है, जिससे निवेश और खपत को बढ़ावा मिलेगा और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी। यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बहुत ही सकारात्मक संकेत है, जो मौजूदा आर्थिक परिदृश्य में स्थिरता लाने और विकास की गति को बनाए रखने में मदद करेगा।



