देहरादून, उत्तराखंड: भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) द्वारा किए गए एक नए अध्ययन में यह चौंकाने वाला निष्कर्ष सामने आया है कि मादा चीते तनाव को लेकर नर चीतों की तुलना में अधिक संवेदनशील होती हैं। यह अध्ययन भारत में चीता पुनर्वास कार्यक्रम के तहत इन बड़ी बिल्लियों के व्यवहार को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। शोधकर्ताओं ने चीतों के तनाव के स्तर को मापने के लिए उनके शारीरिक संकेतों और व्यवहार का गहन विश्लेषण किया।
वन्यजीव संस्थान के अध्ययन में पाया गया कि नर चीते क्वॉरंटीन और बड़े बाड़ों में रखे जाने पर कम तनावग्रस्त थे। इसके विपरीत, मादा चीते इन्हीं परस्थितियों में अधिक तनाव में पाई गईं, जो उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए चिंताजनक है। शोधकर्ताओं का मानना है कि मादा चीतों में यह उच्च तनाव उनके क्षेत्रीय स्वभाव और नए वातावरण में खुद को स्थापित करने की उनकी प्राथमिकता से जुड़ा हो सकता है। इस निष्कर्ष से वन्यजीव प्रबंधकों को चीतों के पुनर्वास और देखभाल की रणनीति में बदलाव करने में मदद मिलेगी।
इस अध्ययन के आधार पर, WII ने सिफारिश की है कि मादा चीतों को प्रारंभिक बाड़ों में कम समय के लिए रखा जाना चाहिए और उन्हें मुक्त वातावरण में जल्दी छोड़ने की योजना बनानी चाहिए। उच्च तनाव का स्तर चीतों में प्रजनन और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता है, इसलिए मादाओं के लिए विशेष देखभाल की जरूरत है। यह शोध चीता संरक्षण प्रयासों को एक नई समझ प्रदान करता है, जिससे भारत में उनकी आबादी को सफल रूप से बढ़ाया जा सके।


