नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कार्यकर्ता की हत्या के एक मामले में कर्नाटक कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में इस बात पर जोर दिया कि विनय कुलकर्णी द्वारा गवाहों से संपर्क करने के प्रयास किए गए थे, जो जमानत दिए जाने के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कारक है। यह फैसला राजनीतिक गलियारों में एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता और जांच को प्रभावित करने की संभावना को देखते हुए यह निर्णय लिया। विधायक विनय कुलकर्णी पर भाजपा कार्यकर्ता योगेश गौड़ा की हत्या का आरोप है, जो [हत्या का वर्ष, यदि ज्ञात हो] में धारवाड़ में हुई थी। कुलकर्णी को पहले भी इस मामले में गिरफ्तार किया गया था और वे कुछ समय जेल में भी रहे थे।
इस फैसले के बाद, विनय कुलकर्णी को अब जेल में ही रहना होगा। सुप्रीम कोर्ट का यह रुख दर्शाता है कि आपराधिक मामलों में, खासकर जब गवाहों को प्रभावित करने की आशंका हो, तो न्यायपालिका बेहद सख्त रवैया अपनाती है। यह घटना कर्नाटक की राजनीति में भी गरमाहट पैदा करेगी और विपक्षी दल इस मुद्दे को उठा सकते हैं।


