झारखंड हाईकोर्ट ने अहम रुख अपनाया। सांसद और विधायकों से जुड़े मामलों की सुनवाई हुई। यह मामला स्वतः संज्ञान के तहत है। पीठ का नेतृत्व जस्टिस रंगोन मुखोपाध्याय ने किया। अदालत ने देरी को गंभीर समस्या बताया। त्वरित न्याय पर जोर दिया गया।
कोर्ट ने सीबीआई को शीघ्र कार्रवाई का निर्देश दिया। मौखिक टिप्पणी में ट्रायल में देरी की आलोचना की गई। अदालत ने कहा कि गवाह प्रभावित होते हैं। इससे सच्चाई सामने आने में कठिनाई होती है। न्यायिक प्रक्रिया कमजोर होती है। समय पर फैसला जरूरी बताया गया।
राज्य सरकार ने दो मामलों की जानकारी दी। सीबीआई ने समय की मांग की। अदालत ने मांग स्वीकार की। अगली सुनवाई 11 फरवरी तय हुई। कोर्ट ने स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा। मामले की नियमित समीक्षा होगी।



