यह कार्यक्रम आगामी 14 सितंबर, रविवार को आयोजित होगा। यह अवसर न सिर्फ उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों के लिए एक मिसाल भी है।
प्रवीण कुमार सिंह का जीवन संघर्ष और सफलता का अद्भुत उदाहरण है। लातेहार जिले के एक छोटे गांव में जन्मे प्रवीण ने कठिन हालात और सीमित साधनों के बावजूद अपनी पढ़ाई जारी रखी। उन्होंने कठिन परिश्रम, अनुशासन और आत्मविश्वास से झारखंड प्रशासनिक सेवा परीक्षा में सफलता पाई। वर्तमान में वे कार्मिक विभाग में एसडीएम पद पर पदस्थापना की प्रतीक्षा में हैं। उनका बीआईटी सिंदरी में वक्ता बनना इस बात का प्रतीक है कि कोई भी सपना बड़ा नहीं होता।
इस कार्यक्रम में वे छात्रों को जीवन मूल्यों, शिक्षा, नेतृत्व और सामाजिक दायित्व पर प्रेरित करेंगे। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि मेहनत और दृढ़ निश्चय से हर बाधा पार की जा सकती है। प्रवीण कुमार सिंह की कहानी युवाओं को यह सिखाती है कि अवसर चाहे कम हों, लेकिन लगन और मेहनत से जीवन की नई राह बनाई जा सकती है। उनकी यह पहल निश्चित रूप से छात्रों के लिए एक नई ऊर्जा का स्रोत बनेगी।



