देहरादून, उत्तराखंड: उत्तराखंड में आपदा की मार झेल रहे कई गाँवों में इस साल दीपावली का उत्साह फीका पड़ गया है, जहाँ जश्न की जगह गम और उदासी का माहौल छाया हुआ है। देहरादून से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित कार्लिगाड गाँव में 15 और 16 सितंबर को हुई भारी बारिश और बाढ़ ने तबाही मचा दी थी। इस प्राकृतिक आपदा में पूरा गाँव बहा दिया गया, जिससे कई परिवार बेघर हो गए और कुछ लोगों ने अपने प्रियजनों को भी खो दिया।
कार्लिगाड के निवासियों के लिए, यह दीपावली खुशियों का नहीं, बल्कि बर्बादी की याद दिलाने वाला पर्व बन गया है। जहाँ लोग रोशनी से घर सजाते हैं, वहाँ इस गाँव के लोग आज भी अस्थायी शिविरों या पड़ोसियों के घर में शरण लेने को मजबूर हैं। गाँव के बुजुर्गों का कहना है कि उनके मन में इतना दर्द है कि वे किसी भी तरह का उत्साह नहीं मना सकते। सरकार और प्रशासन द्वारा राहत कार्य चल रहे हैं, लेकिन नुकसान इतना ज्यादा है कि सामान्य जीवन में लौटना आसान नहीं है।
स्थानीय लोगों ने सरकार से जल्द से जल्द पुनर्वास और मकान निर्माण के लिए मदद की गुहार लगाई है। उनकी आशा है कि अगली दीपावली तक उन्हें एक स्थायी घर मिल जाएगा। यह घटना उत्तराखंड की पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ते जलवायु परिवर्तन के खतरों को और अधिक रेखांकित करती है। पूरा देश दीपावली मना रहा है, लेकिन कार्लिगाड गाँव के लोग अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं।



