आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी.
मुख्य सचिवों को समन. नई दिल्ली: आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे और इससे जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रति कड़ा रुख अपनाया है।
शीर्ष अदालत ने निर्देशों का पालन न करने और अनुपालन हलफनामा (Compliance Affidavit) दाखिल न करने के लिए पश्चिम बंगाल और तेलंगाना को छोड़कर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि, “देश की छवि क्या बन रही है?” यह दिखाता है कि न्यायालय इस संवेदनशील मुद्दे पर सरकारों की ढिलाई से कितना नाराज है।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उसके 22 अगस्त के आदेश में आवारा कुत्तों से संबंधित सभी आवश्यक दिशा-निर्देश शामिल थे, लेकिन इसके बावजूद ज्यादातर राज्यों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। कोर्ट ने सख्त रवैया अपनाते हुए सभी गैर-अनुपालनकारी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को व्यक्तिगत रूप से समन जारी किया है। इन मुख्य सचिवों को अगली सुनवाई के दौरान कोर्ट में उपस्थित होकर जवाब देने का निर्देश दिया गया है। अदालत का यह कठोर कदम बताता है कि वह अब इस मामले में किसी भी तरह की देरी या बहानेबाजी को बर्दाश्त नहीं करेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि आवारा कुत्तों से निपटने के लिए मानवीय और वैज्ञानिक तरीके अपनाए जाने चाहिए, जिसमें ‘एनिमल बर्थ कंट्रोल’ (ABC) नियम 2023 का सख्ती से पालन शामिल है। न्यायालय का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सार्वजनिक सुरक्षा और पशु कल्याण, दोनों के बीच संतुलन बना रहे। इस मामले की अगली सुनवाई तक सभी राज्यों को अपने कार्यों की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। अदालत ने उम्मीद जताई है कि मुख्य सचिवों की व्यक्तिगत उपस्थिति से इस मामले में जल्द ही सकारात्मक प्रगति देखने को मिलेगी और निर्देशों का गंभीरता से पालन सुनिश्चित हो सकेगा।


