इस गांव के छात्रों के लिए अब एक ‘अतिरिक्त विषय’ बन गया है: बिना पुल के नदी कैसे पार करें, जो सरकारी उपेक्षा की एक कड़वी तस्वीर पेश करता है।
चुकूम गांव में वर्षों से एक पुल की मांग की जा रही है। हर चुनाव में नेता पुल बनाने का वादा करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही वादे हवा हो जाते हैं। नतीजा यह है कि ग्रामीण, खासकर स्कूल जाने वाले बच्चे, हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर हैं। बरसात के मौसम में स्थिति और भी बदतर हो जाती है, जब नदी उफान पर होती है, जिससे बच्चों के लिए स्कूल पहुंचना लगभग असंभव हो जाता है।
इस स्थिति ने ग्रामीणों में भारी निराशा और गुस्सा पैदा कर दिया है। उनका कहना है कि सरकार और प्रशासन उनकी मूल आवश्यकताओं की अनदेखी कर रहा है। बिना पुल के, गांव का बाहरी दुनिया से संपर्क अक्सर टूट जाता है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और व्यापार तक पहुंच बाधित होती है। यह मामला एक बार फिर ग्रामीण भारत में बुनियादी ढांचे के अभाव और सरकारी वादों के खोखलेपन को उजागर करता है।



