शीतकालीन सत्र से पहले रांची में सरकारी दफ्तरों की गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। आठ दिसंबर को पेश होने वाले द्वितीय अनुपूरक बजट के कारण विभागों पर काम का दबाव बढ़ गया है। वित्त विभाग ने समयसीमा तय करके प्रस्ताव जमा करने की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। विभागीय मंत्री की अनुमति के बिना कोई भी प्रस्ताव मान्य नहीं होगा। यह प्रक्रिया बजट की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए लागू की गई है।
केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं में केंद्र और राज्य के हिस्सेदारी नियमों को प्राथमिकता दी गई है। राज्य सरकार ने यह भी बताया है कि अतिरिक्त आवश्यकता होने पर टॉप-अप प्रणाली का उपयोग किया जाएगा। पिछले वित्त वर्ष में बची राशि और चालू वर्ष की स्थितियों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। बजटीय सुधारों के लिए विभागों से विशेष दस्तावेज मांगे गए हैं। इससे योजनाओं की प्रभावशीलता बढ़ेगी।
स्थापना व्यय, टोकन राशि, पुनर्विनियोग, और शेयरिंग पैटर्न परिवर्तन जैसे मुद्दों पर भी विभागों को विस्तृत निर्देश प्राप्त हुए हैं। आकस्मिक परिस्थितियों के लिए भेजे जाने वाले प्रस्तावों की भी स्पष्ट रूपरेखा तय की गई है। रांची में इन दिनों पूरा सरकारी ढांचा बजट व्यवस्था को व्यवस्थित करने में लगा है। उम्मीद है कि आने वाला सत्र कई महत्वपूर्ण वित्तीय निर्णयों का गवाह बनेगा।


