जिसने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। यह मामला इतना गंभीर है कि झारखंड और कोलकाता ATS (आतंकवाद निरोधी दस्ता) इस नेटवर्क को खत्म करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। यह दर्शाता है कि अवैध हथियारों का कारोबार अंतरराज्यीय स्तर पर फैल चुका है।
अधिकारियों के अनुसार, झारखंड में निर्मित इन अवैध हथियारों का संबंध अक्सर पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल से होता है, जहाँ इनकी आपूर्ति की जाती है या फिर वहाँ से इन्हें आगे अन्य राज्यों में भेजा जाता है। यह नेटवर्क न केवल आपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा देता है, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए भी एक गंभीर खतरा पैदा करता है। इस गठजोड़ में हथियार बनाने वाले, आपूर्तिकर्ता और खरीदार शामिल होते हैं, जिनका पता लगाना और उन्हें बेनकाब करना एक जटिल चुनौती है।
दोनों राज्यों की ATS टीमें खुफिया जानकारी साझा कर रही हैं और संयुक्त अभियान चला रही हैं ताकि इस पूरे अवैध हथियार निर्माण और तस्करी नेटवर्क को ध्वस्त किया जा सके। इस सहयोग का उद्देश्य इस अवैध व्यापार में शामिल प्रमुख खिलाड़ियों को गिरफ्तार करना और उनकी आपूर्ति श्रृंखलाओं को तोड़ना है। यह कार्रवाई सुनिश्चित करेगी कि देश की सुरक्षा पर कोई आंच न आए और अवैध हथियारों का प्रसार रोका जा सके।



