उन्होंने अपने संदेश में कहा कि करम परब केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की सांस्कृतिक धरोहर और प्रकृति के प्रति गहरी निष्ठा का प्रतीक है। यह पर्व भाई-बहन के रिश्तों को मजबूत करता है और सामाजिक एकजुटता का संदेश देता है।
अनीता देवी ने कहा कि करम पेड़ की पूजा हमें यह याद दिलाती है कि प्रकृति और पर्यावरण हमारी जीवनरेखा हैं। उन्होंने कहा कि परंपराओं का निर्वहन करते हुए हमें आने वाली पीढ़ी को भी अपनी संस्कृति से जोड़ना चाहिए। इस पर्व के माध्यम से समाज में भाईचारे और सद्भाव की भावना और अधिक प्रगाढ़ होती है। उन्होंने करम महा परब को प्रकृति संरक्षण और सांस्कृतिक एकता का उत्सव बताया।
अपने संदेश में उपाध्यक्ष ने जिले के सभी नागरिकों से अपील की कि वे इस पर्व को शांति, प्रेम और पारंपरिक गरिमा के साथ मनाएँ। उन्होंने कहा कि करम महा परब हमें समाज और पर्यावरण दोनों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का बोध कराता है। अनीता देवी ने विश्वास जताया कि यह पर्व जिले में एकता और सहयोग की भावना को और प्रबल करेगा।



