यह मामला फर्जी इनवॉइस जारी करके इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का धोखाधड़ी से लाभ उठाने से जुड़ा है। जीएसटी विभाग की जांच में यह वित्तीय अनियमितता सामने आई है।
जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी फर्म ने कथित तौर पर लगभग ₹112 करोड़ मूल्य के फर्जी इनवॉइस जारी किए। इन फर्जी बिलिंग के परिणामस्वरूप फर्म ने ₹17.14 करोड़ के इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का धोखाधड़ी से लाभ उठाया और उसका उपयोग किया। जीएसटी अधिकारियों ने बताया कि इस तरह से कुल जीएसटी चोरी की राशि ₹21.64 करोड़ तक पहुँच गई है। कर अपवंचन (टैक्स इवेजन) के इस गंभीर मामले में शामिल मुख्य व्यक्ति को गिरफ्तार करके न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
जीएसटी विभाग ने स्पष्ट किया है कि वे फर्जी बिलिंग और आईटीसी का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रखेंगे। इस गिरफ्तारी से उन लोगों को कड़ा संदेश मिला है जो देश की राजस्व प्रणाली को धोखा देने की कोशिश करते हैं। मामले में आगे की जांच जारी है और इसमें शामिल अन्य व्यक्तियों और कंपनियों पर भी नकेल कसी जाएगी। सरकार वित्तीय पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।


