नागपुर स्थित जन संघर्ष समिति के अध्यक्ष दत्ता शिरके ने दावा किया है कि मृतक का परिवार न केवल सहायता के बिना जीवन जी रहा है, बल्कि लगातार डर के साए में रहने को मजबूर है। यह स्थिति नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पीड़ित परिवारों की दुर्दशा को उजागर करती है।
दत्ता शिरके ने इस बात पर जोर दिया कि मुनेश नुरेती को नक्सलियों ने पुलिस मुखबिर होने के संदेह में मार डाला था। उन्होंने कहा कि परिवार को हुई क्षति अकल्पनीय है, और इस मुश्किल समय में सरकार को त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए थी। समिति ने मांग की है कि परिवार को न केवल तत्काल आर्थिक सहायता दी जाए, बल्कि उनके जीवन यापन और सुरक्षा के लिए स्थायी व्यवस्था की जाए। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बल द्वारा घोषित योजनाओं का लाभ पीड़ितों तक ठीक से नहीं पहुँच पा रहा है।
स्थानीय प्रशासन के सूत्रों के अनुसार, परिवार को मुआवजा देने की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन जटिल कागजी कार्रवाई और प्रशासनिक विलंब के कारण इसमें देरी हो रही है। जन संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत हस्तक्षेप करने और नुरेती के परिवार को न्याय और सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना दर्शाती है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास लाने के लिए पीड़ितों को त्वरित सहायता देना कितना आवश्यक है, ताकि स्थानीय आबादी का विश्वास मजबूत हो सके।



