झारखंड हाईकोर्ट ने पत्थर खनन पट्टे से जुड़े विवाद में निर्णय सुनाया है। अदालत ने याचिकाकर्ता की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि रॉयल्टी भुगतान अनिवार्य है। मामला पलामू जिले के चपरवार मौजा से जुड़ा है। खनन पट्टा वर्ष 2014 में दिया गया था। सभी आवश्यक अनुमतियां ली गई थीं। इसके बावजूद भुगतान नहीं किया गया। अदालत ने इसे गंभीर चूक माना। सरकारी कार्रवाई को सही ठहराया गया। याचिकाकर्ता को राहत नहीं मिली।
राज्य सरकार ने बताया कि 2016 से 2019 तक रॉयल्टी बकाया रही। जिला खनन पदाधिकारी ने नोटिस जारी किया। बकाया नहीं चुकाने पर पट्टा रद्द किया गया। उपायुक्त ने प्रस्ताव को मंजूरी दी। फरवरी 2020 में सूचना दी गई। याचिकाकर्ता ने अदालत में चुनौती दी। राज्य ने नियमों के तहत कार्रवाई बताई। अदालत ने राज्य की दलील मानी। खान आयुक्त का आदेश सही ठहराया गया। नियमों का पालन जरूरी बताया गया।
खंडपीठ ने कहा कि तथ्य विवादित नहीं हैं। प्राकृतिक न्याय का सहारा नहीं लिया जा सकता। मामले को वापस भेजना औपचारिकता होगी। अदालत ने याचिका निराधार मानी। हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। यह फैसला खनन नीति को मजबूत करता है। नियम उल्लंघन पर सख्ती का संकेत मिला। खनन क्षेत्र में जवाबदेही तय हुई है। पट्टाधारकों को स्पष्ट संदेश गया है। कानून सर्वोपरि बताया गया है।


