JharkahndStates

झारखंड हाईकोर्ट ने अवैध खनन मामले में सरकार को घेरा आज.

सवानी नदी और पर्यावरण नुकसान पर अदालत ने चिंता जतायी गंभीर.

झारखंड हाईकोर्ट ने हजारीबाग में अवैध पत्थर खनन को लेकर सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि लगातार हो रही अवैध गतिविधियां प्रशासन की बड़ी विफलता दर्शाती हैं। कोर्ट ने जिला प्रशासन, पुलिस और खनन विभाग को जिम्मेदार ठहराया है। सवानी नदी और आसपास के क्षेत्रों में अवैध खनन से पर्यावरण प्रभावित हो रहा है। खेती योग्य जमीन को भी भारी नुकसान पहुंचा है। अदालत ने इसे लोगों के जीवन और स्वास्थ्य के लिए खतरा बताया है। चीफ जस्टिस एम एस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। अदालत ने संबंधित विभागों की निष्क्रियता पर नाराजगी व्यक्त की। कोर्ट ने कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई जरूरी है।

हाईकोर्ट ने कहा कि अवैध खनन के खिलाफ प्रभावी कदम नहीं उठाये गये। अदालत ने माना कि बड़े पैमाने की गतिविधियां अधिकारियों की जानकारी के बिना संभव नहीं हैं। भारी मशीनों और वाहनों के संचालन के बावजूद प्रशासन चुप रहा। कोर्ट ने सरकार को 15 अहम दिशा निर्देश जारी किये हैं। जिला स्तरीय टास्क फोर्स को हर महीने बैठक करनी होगी। सभी खनन लाइसेंस और पर्यावरणीय स्वीकृतियों की जांच होगी। जांच पूरी होने तक खनन गतिविधियों पर रोक जारी रहेगी। अदालत ने वाइल्डलाइफ सेंचुरी के आसपास खनन पर प्रतिबंध बरकरार रखा। कोर्ट ने प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर दिया है। टास्क फोर्स की रिपोर्ट वेबसाइट पर सार्वजनिक करनी होगी।

कोर्ट ने आधुनिक तकनीक से निगरानी बढ़ाने का निर्देश दिया है। सीसीटीवी कैमरे और जीपीएस ट्रैकिंग प्रणाली लागू होगी। शिकायत दर्ज कराने के लिए हेल्पलाइन और ईमेल सेवा शुरू की जाएगी। जिला खनन अधिकारी को अवैध खनन में शामिल लोगों पर मुकदमा दर्ज करना होगा। पुलिस को समय सीमा के भीतर चार्जशीट दाखिल करने को कहा गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को अवैध इकाइयों की बिजली काटने का निर्देश मिला है। अदालत ने पर्यावरणीय क्षति की भरपाई के लिए मुआवजा लगाने की बात कही। बंद और परित्यक्त खदानों को सुरक्षित करने का आदेश दिया गया है। कोर्ट ने साफ कहा कि आदेशों की अनदेखी पर अधिकारियों पर व्यक्तिगत कार्रवाई होगी। इस फैसले को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button