देहरादून, उत्तराखंड: उत्तराखंड सरकार इस वर्ष चार धामों की शीतकालीन यात्रा को बढ़ावा देने और उसे सफल बनाने के लिए पूरी तरह से तैयारियों में जुट गई है। चारों धामों के कपाट सर्दियों के लिए बंद होने के बाद, उनकी शीतकालीन गद्दीस्थलों (विंटर सीट्स) की यात्रा को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। यह पहल राज्य में साल भर पर्यटन गतिविधियों को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
शीतकालीन तीर्थयात्रा की यह धारणा मूल रूप से ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा पहली बार सामने रखी गई थी। उन्होंने 2023 में व्यक्तिगत रूप से इस यात्रा को शुरू करके एक नई परंपरा की शुरुआत की थी, जिससे यह भ्रम दूर हो सके कि भगवान के दर्शन साल के सिर्फ छह महीने ही उपलब्ध रहते हैं। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि शीतकालीन गद्दीस्थलों की यात्रा का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। इसके अलावा, यात्रियों को आकर्षित करने के लिए किराए में 10 प्रतिशत तक की छूट देने के निर्देश भी दिए गए हैं।
शीतकालीन चार धाम यात्रा में श्रद्धालु बद्रीनाथ के दर्शन पांडुकेश्वर में, केदारनाथ के ऊखीमठ में, गंगोत्री के मुखबा में और यमुनोत्री के खरसाली में करते हैं। सरकार इस सर्किट पर सड़क सुविधाओं, सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दे रही है। इस पहल से न केवल तीर्थयात्रियों को पूरे साल दर्शन का लाभ मिलेगा, बल्कि शीतकाल में भी स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। यह यात्रा उत्तराखंड को बारहमासी पर्यटन राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वाकांक्षी कदम है।



