झारखंड में वर्षों से उग्रवाद का केंद्र रहे गिरोहों में से एक झांगुर गिरोह अब आत्मसमर्पण की राह पर है. इसका संकेत तब मिला जब पुलिस ने पुष्टि की कि सरगना रामदेव उरांव संपर्क में है. आत्मसमर्पण न केवल गिरोह के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है.
यह गिरोह 23 वर्षों से हिंसा का प्रतीक रहा है. ग्रामीणों ने भय में जिंदगी बिताई है और प्रशासन वर्षों से इस गिरोह को समाप्त करने की कोशिश करता रहा है. अब स्थिति बदलती दिख रही है.
यह घटना सिर्फ कानून व्यवस्था की जीत नहीं, बल्कि लोकतंत्र और मानवता की जीत मानी जा रही है. उम्मीद की जानी चाहिए कि समर्पण के बाद पुनर्वास और विकास व्यवस्था तेजी से लागू होगी.


