क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (CMC), वेल्लोर में स्टेम सेल रिसर्च के प्रमुख डॉ. निहाल थॉमस ने मधुमेह के एक असामान्य रूप पर अभूतपूर्व अंतर्दृष्टि साझा की है, जिसे अब ‘टाइप 5’ मधुमेह कहा जा रहा है। यह नया वर्गीकरण कुपोषण और मधुमेह के बीच के जटिल संबंध को उजागर करता है।
डॉ. थॉमस के शोध से पता चला है कि ‘टाइप 5’ मधुमेह उन व्यक्तियों में विकसित होता है जो लंबे समय तक कुपोषण से ग्रस्त रहे हैं। यह पारंपरिक टाइप 1 (इंसुलिन की कमी) और टाइप 2 (इंसुलिन प्रतिरोध) मधुमेह से अलग है। यह दर्शाता है कि पोषण की कमी शरीर के इंसुलिन उत्पादन और उपयोग की क्षमता को कैसे प्रभावित कर सकती है, जिससे एक विशिष्ट प्रकार का मधुमेह हो सकता है। यह खोज विशेष रूप से उन विकासशील देशों के लिए महत्वपूर्ण है जहाँ कुपोषण अभी भी एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है।
इस नई समझ से ‘टाइप 5’ मधुमेह के निदान और उपचार के लिए नए दृष्टिकोण विकसित करने में मदद मिलेगी। यह डॉक्टरों और शोधकर्ताओं को उन रोगियों पर अधिक ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित करेगा जिनके पास कुपोषण का इतिहास है, ताकि इस प्रकार के मधुमेह को शुरुआती चरण में पहचाना जा सके और उचित हस्तक्षेप किया जा सके।


