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पहले बच्चे की मौत बाद तमिलनाडु को एमपी से सूचना मिली.

चेन्नई/भोपाल: 'कोल्ड्रिफ' कफ सिरप से हुई बच्चों की मौतों को लेकर उत्पन्न विवाद में राज्यों के बीच सूचना के आदान-प्रदान में गंभीर देरी का मामला सामने आया है।

तमिलनाडु सरकार ने एक प्रेस विज्ञप्ति में जानकारी दी है कि मध्य प्रदेश सरकार ने तमिलनाडु स्थित कंपनी द्वारा बनाए गए सिरप से जुड़ी पहली बच्चे की मौत के एक महीने बाद उन्हें इस बारे में सूचित किया। इस देरी ने निश्चित रूप से संकट की गंभीरता को बढ़ा दिया और तत्काल कार्रवाई में बाधा उत्पन्न की।

तमिलनाडु सरकार ने अपनी ओर से कहा कि मध्य प्रदेश सरकार से सूचना मिलने के बाद उन्होंने 48 घंटों के भीतर कड़ी कार्रवाई की। राज्य औषधि नियंत्रण विभाग ने शीघ्र ही तमिलनाडु की उस कंपनी की जांच शुरू कर दी, जिसने संक्रमित ‘कोल्ड्रिफ’ कफ सिरप का निर्माण किया था। जांच में पुष्टि हुई कि सिरप में डायथाइलीन ग्लाइकॉल (DEG) नामक जहरीला रसायन खतरनाक स्तर पर मौजूद था, जो बच्चों की मौतों का कारण बना। तमिलनाडु सरकार ने उत्पाद की बिक्री पर तत्काल रोक लगा दी और उत्पादन इकाई का लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी।

इस पूरे घटनाक्रम ने दोनों राज्यों के बीच अंतर्राज्यीय समन्वय और तत्काल स्वास्थ्य चेतावनी प्रणाली में खामियों को उजागर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सूचना तुरंत साझा की जाती, तो और बच्चों की जान बचाई जा सकती थी। मध्य प्रदेश और तमिलनाडु की पुलिस अब इस मामले की गहन जांच कर रही हैं और सिरप निर्माता कंपनी के मालिक को गिरफ्तार किया जा चुका है। यह हादसा देश में दवाओं की गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाता है, जिससे भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए कड़े सुधारों की आवश्यकता है।

 

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