जिसने जैव विविधता के क्षेत्र में उत्साह पैदा कर दिया है। जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ZSI) के वैज्ञानिकों ने इस नई प्रजाति का नाम ‘हेमीफिलोडेक्टिलस वेंकटाद्री एसपी.एनओवी’ रखा है। यह खोज शेषाचलम पहाड़ियों के पारिस्थितिक महत्व को और अधिक उजागर करती है।
यह नई प्रजाति हेमीफिलोडेक्टिलस (Hemiphyllodactylus) जीनस से संबंधित है, जो अपनी निशाचर आदतों और वन्य वातावरण में आसानी से ढल जाने की क्षमता के लिए जाना जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस जीनस की छिपकलियाँ आमतौर पर पहाड़ी और घने जंगल वाले क्षेत्रों में पाई जाती हैं। इस प्रजाति का पाया जाना दर्शाता है कि शेषाचलम बायोस्फीयर रिजर्व अभी भी कई अनखोजी और अद्वितीय जीवों का घर है। शोधकर्ताओं ने इस खोज को भारत की जैव विविधता के लिए एक महत्वपूर्ण योगदान बताया है।
शोधकर्ताओं ने इस खोज के बाद रिजर्व के संरक्षण प्रयासों को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उनका कहना है कि इस तरह की दुर्लभ प्रजातियों की सुरक्षा के लिए पर्यावास विनाश और मानवीय हस्तक्षेप को नियंत्रित करना आवश्यक है। ZSI की टीम अब इस नई प्रजाति के आवास, व्यवहार और जनसंख्या का विस्तृत अध्ययन करेगी। यह खोज वन्यजीव संरक्षण के महत्व को रेखांकित करती है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि यह क्षेत्र भविष्य की पीढ़ियों के लिए अपनी समृद्ध जैव विविधता को बनाए रखे।


