यह संस्था 1919 से समाज, शिक्षा और आस्था के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। अपने एक सदी के सफर में चर्च ने कई सामाजिक और धार्मिक बदलावों का नेतृत्व किया है।
शुरुआत में चर्च के सर्वोच्च पद पर आसीन व्यक्ति को ‘प्रेसिडेंट’ कहा जाता था। 1919 में पहले प्रेसिडेंट रेव्ह हनुक्काह लकड़ा बने, जिन्होंने पांच वर्षों तक सेवा दी। उनके बाद रेव्ह जॉहन टोपनो, दाऊद कुजूर, रेव्ह जुएल लकड़ा, रेव्ह हबील टोपनो और रेव्ह जेम्स पॉल तिग्गा जैसे महान व्यक्तित्वों ने इस पद की गरिमा को बनाए रखा।
1960 के दशक में यह पद ‘प्रमुख अध्यक्ष’ कहलाने लगा। फिर 1990 से इसे ‘मॉडरेटर’ कहा जाने लगा। वर्तमान में मॉडरेटर मार्सल केरकेट्टा हैं, जिन्होंने चर्च को आधुनिक युग के अनुरूप डिजिटल और राष्ट्रीय स्तर पर कार्यरत बनाया है।


