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कर विवाद में न्यायिक संतुलन का उदाहरण बना यह फैसला.

गलत टैक्स अनुमान सुधारने की प्रक्रिया व्यापार जगत में उम्मीद बढ़ाती.

GST विभाग द्वारा जारी बड़े डिमांड नोटिस ने व्यापार जगत में चिंता पैदा कर दी थी. M/S AT DEV PRABHA पर 48 करोड़ रुपये की मांग ने विवाद को चर्चित बना दिया था. ऑडिट रिपोर्ट में कथित गड़बड़ी और ITC लाभ प्रमुख आधार थे.

सुनवाई के बाद निर्णय में भारी अंतर आया. दस्तावेजों और वास्तविक आंकड़ों की जांच के बाद देनदारी 98 हजार रुपये पर तय की गई. माना जा रहा है कि यह फैसला कर प्रणाली में दुरुस्ती के लिए प्रोत्साहन देगा.

अब मामला समीक्षा स्तर पर आगे बढ़ेगा. निर्णय व्यावसायिक पारदर्शिता को मजबूती देने का संकेत देता है. उद्योग संगठन इसे सुधारवादी कदम बता रहे हैं.

 

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