झारखंड में तेजी से गिरते तापमान को सिर्फ मौसम परिवर्तन नहीं बल्कि चेतावनी की तरह देखा जाना चाहिए. ठंड का यह दौर आने वाले दिनों में और भी कठिन हो सकता है. ऐसे में प्रशासन और जनता दोनों को सतर्क रहने की जरूरत है.
स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों पर सबसे ज्यादा खतरा रहता है. इसलिए सरकार को स्वास्थ्य सेवाओं और राहत उपायों को सक्रिय रखना चाहिए. ग्रामीण इलाकों में अलाव की व्यवस्था समय रहते होनी चाहिए.
अगर आने वाले दिनों में तापमान में थोड़ा सुधार भी आता है, तो भी तैयारियों में कमी नहीं होनी चाहिए. मौसम बदल रहा है और इसके साथ हमें भी अपनी आदतें बदलनी होंगी.



