यह फैसला केवल आठ कर्मचारियों के रोजगार का मामला नहीं है, बल्कि यह न्यायिक प्रणाली के उस सिद्धांत को दोहराता है कि प्रशासनिक गलती की सजा कर्मचारी को नहीं मिलनी चाहिए. बोकारो बाल सुधार गृह के मामले में यह स्पष्ट था कि नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह आधिकारिक थी.
सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि यह संविदा आधारित नियुक्ति थी, पर सर्विस बुक खोलना प्रशासनिक निर्णय था. कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया और कहा कि अधिकार दिए जाने के बाद उसे वापस लेना अनुचित है.
यह आदेश भविष्य में शासन-प्रशासन को अधिक सतर्क रहने का संदेश देता है. यह फैसला न्याय, पारदर्शिता और कर्मचारी अधिकारों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण माना जाएगा.

