झारखंड में सुरक्षा व्यवस्था लगातार सवालों के घेरे में है। अपराधियों की फरारी आम होती जा रही है। इससे प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठे हैं। जनता में नाराजगी बढ़ रही है। हालात गंभीर बनते जा रहे हैं।
पाकुड़ कोर्ट से दोषियों का भाग जाना बड़ी चूक थी। अदालत परिसर की सुरक्षा पर सवाल उठे। हजारीबाग जेल से तीन कैदियों का भागना और भी चिंताजनक है। यह जेल अत्यधिक सुरक्षित मानी जाती है। बावजूद इसके फरारी हुई।
थाना परिसर से आरोपी का फरार होना पुलिस लापरवाही दिखाता है। हालांकि बाद में गिरफ्तारी से राहत मिली। लेकिन घटनाओं की पुनरावृत्ति चिंता बढ़ाती है। विशेषज्ञ व्यापक जांच की मांग कर रहे हैं। सुधार अब जरूरी हो गया है।


