झारखंड हाईकोर्ट ने एक बार फिर सख्ती दिखाई है। निलंबित IAS विनय चौबे को जमानत नहीं मिली। अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी। फैसला न्यायिक सख्ती को दर्शाता है। मामले को जनहित से जोड़ा गया।
विनय चौबे पर गंभीर आरोप हैं। सरकारी और प्रतिबंधित जमीनों का गलत हस्तांतरण किया गया। बिचौलियों की भूमिका सामने आई है। जांच एजेंसी ने सहयोग न मिलने की बात कही। कोर्ट ने इस पर चिंता जताई।
न्यायालय ने कहा कि ऐसे अपराध व्यवस्था को नुकसान पहुंचाते हैं। आर्थिक अपराधों से भरोसा टूटता है। जमानत मिलने पर जांच बाधित हो सकती है। इसलिए राहत नहीं दी गई। आगे जांच जारी रहेगी।

