झारखंड हाईकोर्ट में एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कड़ी टिप्पणी की। खंडपीठ ने कहा कि प्रशासनिक देरी व्यवस्था को कमजोर करती है। अदालत ने मामले को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण बताया। न्यायालय ने पूछा कि आदेश होने के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई। इससे न्याय प्रक्रिया पर असर पड़ता है।
सुनवाई के दौरान विभागीय सचिव ने अदालत को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई का अधिकार सीमित होता है। उपायुक्त को राजस्व कर्मचारी पर कार्रवाई का अधिकार प्राप्त है। अदालत ने इस स्पष्टीकरण को ध्यान से सुना। लेकिन देरी को लेकर असंतोष जताया गया।
कोर्ट ने पूछा कि आठ वर्षों तक कार्रवाई लंबित क्यों रही। इस सवाल का संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा सका। सरकार से भविष्य की व्यवस्था मजबूत करने पर सुझाव मांगा गया। अगली सुनवाई दो अप्रैल को तय की गई है। फिलहाल अधिकारियों की व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दी गई।



