रांची में गर्मी का असर इस बार मार्च महीने से ही दिखने लगा है। तेज धूप और बढ़ते तापमान ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। दिन के समय सड़कों पर आवाजाही कम होने लगी है। गर्म हवाओं का असर अब जमीन पर भी दिखाई देने लगा है। लगातार तापमान बढ़ने से जलस्तर तेजी से नीचे जा रहा है। इसका असर शहर के जल स्रोतों पर साफ नजर आ रहा है। कई इलाकों में जलाशयों का पानी कम हो गया है। दीप बोरिंग और चपाकलों से पानी निकलना भी प्रभावित हुआ है। नगर निगम क्षेत्रों में पेयजल संकट की स्थिति बनने लगी है। लोग पानी की व्यवस्था को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं।
मार्च महीने में ही कई मोहल्लों के कुएं सूखने लगे हैं। पानी की समस्या से जूझ रहे क्षेत्रों की संख्या बढ़ रही है। नगर निगम के अनुसार कुछ इलाके पहले से ही जल संकट प्रभावित हैं। वर्ष 2025 में कई क्षेत्रों को ड्राईजोन घोषित किया गया था। इन इलाकों में हर साल गर्मी के दौरान स्थिति गंभीर हो जाती है। नगर निगम ने ऐसे 361 स्थानों को चिन्हित किया है। इन जगहों पर पानी की सबसे ज्यादा किल्लत होती है। स्थानीय लोगों को रोजाना पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। कई परिवारों को दूर से पानी लाना पड़ रहा है। इससे आम जीवन प्रभावित होने लगा है।
जल संकट से निपटने के लिए नगर निगम ने विशेष योजना लागू की है। 53 वार्डों में पानी सप्लाई सुनिश्चित करने की तैयारी की गई है। इसके लिए 70 पानी टैंकर लगाए गए हैं। जरूरत वाले क्षेत्रों में नियमित जल आपूर्ति की जा रही है। नगर निगम ने 1611 मिनी HYDT मशीनों की व्यवस्था की है। साथ ही 181 HYDT को भी सेवा में लगाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। प्रशासन गर्मी के मौसम में जल संकट कम करने का प्रयास कर रहा है। नागरिकों से भी पानी बचाने की अपील की गई है।


