रांची के नामकुम स्थित लोक स्वास्थ्य संस्थान में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यक्रम का उद्देश्य कुष्ठ रोग से प्रभावित लोगों के प्रति सामाजिक सोच बदलना था। कार्यशाला राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन झारखंड के कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के तहत आयोजित हुई। कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी शामिल हुए। विशेषज्ञों ने कुष्ठ रोग से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। कार्यशाला का मुख्य विषय कलंक को कम करना रहा। साथ ही इलाज की गुणवत्ता बेहतर बनाने पर जोर दिया गया। करुणा आधारित प्रशिक्षण को कार्यक्रम का केंद्र बनाया गया। प्रतिभागियों को संवेदनशील व्यवहार के महत्व के बारे में बताया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्वास्थ्य कर्मियों ने भाग लिया।
अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने कार्यशाला को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण से सकारात्मक बदलाव आएगा। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं में मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत बताई। मरीजों के साथ भावनात्मक जुड़ाव को महत्वपूर्ण बताया गया। उन्होंने कहा कि संवेदनशील व्यवहार से उपचार प्रभावी होता है। स्वास्थ्यकर्मियों को मरीजों के प्रति सहानुभूति रखने की सलाह दी गई। प्रशिक्षण सत्र में कई उदाहरण प्रस्तुत किए गए। विशेषज्ञों ने व्यवहारिक अनुभव साझा किए। प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से चर्चा में हिस्सा लिया। कार्यक्रम का माहौल शिक्षाप्रद और प्रेरणादायक रहा।
राज्य कुष्ठ निवारण पदाधिकारी डॉ. अनिल कुमार ने भी विचार रखे। उन्होंने समाज में फैली गलत धारणाओं को दूर करने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि कुष्ठ रोग एक जीवाणु जनित बीमारी है। इसका इलाज पूरी तरह संभव है। मरीजों के सामाजिक बहिष्कार को गलत बताया गया। उन्होंने सम्मानजनक व्यवहार अपनाने की अपील की। कार्यशाला में शोध आधारित जानकारी साझा की गई। वक्ताओं ने सहानुभूतिपूर्ण देखभाल के फायदे बताए। अंत में सभी प्रतिभागियों ने कुष्ठ रोग मुक्त झारखंड का संकल्प लिया। कार्यक्रम सकारात्मक संदेश के साथ संपन्न हुआ।



