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दिल्ली में क्लाउड सीडिंग से बारिश नहीं.

प्रयोग विफल होने के कारण सामने आए.

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण (Air Pollution) के खतरनाक स्तर से निपटने के लिए दिल्ली सरकार द्वारा सहारा ली गई ‘क्लाउड सीडिंग’ (Cloud Seeding) तकनीक का प्रायोगिक परीक्षण अब तक असफल रहा है। कृत्रिम रूप से बारिश कराने की यह महत्वाकांक्षी योजना, जिसका उद्देश्य प्रदूषण के कणों को जमीन पर बिठाना था, वांछित परिणाम देने में विफल रही है। सरकार ने हालांकि हार नहीं मानी है और फरवरी 2026 तक अधिक ट्रायल आयोजित करने की योजना बनाई है।

इस प्रयोग की विफलता के पीछे मौसम विज्ञान संबंधी कई कारण सामने आए हैं। विशेषज्ञों ने बताया कि क्लाउड सीडिंग को सफल बनाने के लिए पर्याप्त नमी वाले उपयुक्त बादल (Suitable Clouds with sufficient moisture) का होना आवश्यक है, जो परीक्षण के समय उपलब्ध नहीं थे। क्लाउड सीडिंग में सिल्वर आयोडाइड जैसे रसायनों को बादलों में फैलाया जाता है, लेकिन बादलों की अनुपस्थिति या कमजोर संरचना के कारण यह प्रक्रिया वांछित संघनन (Condensation) नहीं कर पाई। इसके अलावा, हवा की गति और तापमान जैसे अन्य वातावरणीय कारक भी अनुकूल नहीं रहे, जिससे कृत्रिम बारिश नहीं हो सकी।

दिल्ली सरकार अब इस तकनीक को सफल बनाने के लिए वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम कर रही है और फरवरी 2026 तक अनुकूल मौसम की स्थिति मिलने पर और अधिक परीक्षणों की योजना बना रही है। सरकार का कहना है कि वे इस पर्यावरण संकट से निपटने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। यह विफलता इस बात को रेखांकित करती है कि कृत्रिम बारिश लाना एक जटिल वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जो पूरी तरह से प्राकृतिक मौसम की स्थितियों पर निर्भर करती है। प्रदूषण से तत्काल राहत के लिए क्लाउड सीडिंग को एक अंतिम उपाय के तौर पर देखा जा रहा था, लेकिन अब दीर्घकालिक समाधानों पर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक है।

 

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