झरिया की घटना समाज की सच्चाई उजागर करती है। एक मेहनतकश महिला पर हमला हुआ। आरोपी ने रसूख का इस्तेमाल किया। यह घटना केवल व्यक्तिगत नहीं है। यह व्यवस्था की भी परीक्षा है।
महिला सफाईकर्मी सबसे कमजोर वर्ग से आती हैं। उनके साथ हिंसा गंभीर चिंता है। कानून का डर यदि कमजोर हो जाए तो ऐसे मामले बढ़ते हैं। समाज को आत्ममंथन करना होगा।
पुलिस जांच निर्णायक होगी। दोषी को सजा मिलनी चाहिए। तभी विश्वास बहाल होगा। यह घटना बदलाव की मांग कर रही है।


