12 मई 2016 की सुबह जमशेदपुर में गोलियां चली थीं। संजीव सिंह अपनी कार से जा रहे थे। रेलवे फाटक बंद था। इसी दौरान घात लगाए अपराधियों ने हमला किया। ताबड़तोड़ फायरिंग में उनकी मौत हो गई। घटना ने पूरे शहर को हिला दिया।
मामले की जांच चली। कई आरोपी बनाए गए। तेरह गवाह कोर्ट में पेश हुए। लंबे ट्रायल के बाद दो दोषी साबित हुए। कोर्ट ने उन्हें उम्रकैद दी।
दस साल बाद आए फैसले ने न्याय की उम्मीद जगाई है। यह केस लंबे समय तक चर्चा में रहा। अब कानूनी प्रक्रिया पूरी हुई। समाज ने राहत की सांस ली है।


