यह भूमि घोटाला तत्कालीन डीसी कार्यकाल का है। उस समय बड़े स्तर पर जमीन का लेनदेन हुआ। प्रशासनिक निगरानी पर सवाल उठे।
जांच में कई खामियां सामने आईं। सरकारी और निजी जमीनें शामिल पाई गईं। भूदान आंदोलन की जमीन भी प्रभावित हुई। यह मामला संवेदनशील बन गया।
अब कोर्ट के फैसले से प्रशासन पर दबाव बढ़ा है। जांच एजेंसी सख्त कदम उठा रही है। भविष्य में जिम्मेदारी तय होगी। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।


