रांची : झारखंड में अवैध हथियारों के कारोबार का तरीका बदलता नजर आ रहा है। पहले यह धंधा आपराधिक गिरोहों और बिचौलियों के जरिए गुप्त रूप से चलता था। अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इसका नया माध्यम बनते दिखाई दे रहे हैं। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की जांच में यह तथ्य सामने आया है। जांच के दौरान कई डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संदिग्ध गतिविधियां देखी गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन माध्यमों का गलत उपयोग किया जा रहा है। कुछ लोग हथियारों का प्रदर्शन कर रहे हैं। कई मामलों में खरीद-बिक्री की बातचीत भी पाई गई है। युवाओं को इसमें शामिल करने की कोशिश की जा रही है। इससे कानून-व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है।
पुलिस के अनुसार कई जिलों में ऐसे मामलों का खुलासा हुआ है। रांची, धनबाद और बोकारो में कार्रवाई की गई है। सोशल मीडिया मॉनिटरिंग के जरिए कई लोगों की पहचान हुई है। कुछ लोगों को अवैध हथियारों के साथ गिरफ्तार भी किया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह गंभीर अपराध है। डिजिटल माध्यमों पर हथियारों का प्रदर्शन भी कानून के खिलाफ है। आर्म्स एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई की जा सकती है। कई मामलों में पोस्ट के आधार पर केस दर्ज किए गए हैं। पुलिस ने बताया कि जांच लगातार जारी है। संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई की जा रही है।
इस चुनौती से निपटने के लिए पुलिस ने साइबर मॉनिटरिंग मजबूत की है। कई जिलों में साइबर सेल की टीमें बनाई गई हैं। ये टीमें सोशल मीडिया पर लगातार नजर रख रही हैं। संदिग्ध पोस्ट सामने आने पर तुरंत जांच शुरू की जाती है। अधिकारियों ने युवाओं से जिम्मेदारी से सोशल मीडिया उपयोग करने की अपील की है। दिखावे के लिए हथियारों के साथ फोटो पोस्ट करने से बचने को कहा गया है। पुलिस ने नागरिकों से भी सहयोग मांगा है। संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तुरंत देने की अपील की गई है। प्रशासन अवैध नेटवर्क को खत्म करने के लिए कार्रवाई कर रहा है। तकनीकी निगरानी और छापेमारी अभियान लगातार जारी है।



