पुलिस ने अदालत में दाखिल अपने हलफनामे में आरोप लगाया है कि ये दंगे एक पूर्व नियोजित साजिश का हिस्सा थे, जिसका उद्देश्य केवल हिंसा भड़काना नहीं, बल्कि देश को अस्थिर करना और ‘शासन परिवर्तन’ (Regime Change) के एक बड़े अभियान को अंजाम देना था। पुलिस के इस दावे ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में एक बार फिर से गहन बहस छेड़ दी है।
पुलिस का आरोप है कि विभिन्न कार्यकर्ताओं और छात्र नेताओं को एक व्यापक ‘शासन परिवर्तन’ ऑपरेशन के हिस्से के रूप में इस साजिश से जोड़ा गया था। जांच एजेंसियों का कहना है कि दंगों को जानबूझकर ऐसे समय और स्थानों पर भड़काया गया था जिससे देश की राजधानी में अराजकता और डर का माहौल पैदा हो सके। पुलिस के अनुसार, इस षड्यंत्र का अंतिम लक्ष्य लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार को अस्थिर करना था। पुलिस ने अपनी चार्जशीट में विभिन्न समूहों और व्यक्तियों के बीच गहरे साठगांठ की बात कही है।
जांच अधिकारियों ने यह भी दावा किया है कि इस साजिश के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी समर्थन और फंडिंग प्राप्त की गई थी। पुलिस ने अदालत से अनुरोध किया है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए गहन जाँच जारी रखी जाए। हालांकि, गिरफ्तार कार्यकर्ताओं और उनके समर्थकों ने पुलिस के इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा बताया है। यह मामला दिखाता है कि फरवरी 2020 के दंगों के पीछे की वास्तविक मंशा को लेकर कानूनी लड़ाई अभी लंबी चलेगी।



