लोहरदगा की यह घटना चेतावनी मानी जा रही है। अवैध बालू माफिया अब खुलेआम हिंसा पर उतर आए हैं। अधिकारी भी सुरक्षित नहीं दिख रहे हैं।
यह हमला दर्शाता है कि अवैध खनन कितना संगठित हो चुका है। कार्रवाई करने वालों को डराने की कोशिश की जा रही है। इससे शासन की साख पर असर पड़ता है।
अब जरूरत है कड़ी कार्रवाई की। दोषियों पर सख्त कदम उठाने होंगे। तभी अवैध बालू कारोबार पर लगाम लग सकेगी।


